Poetry Collection of “Gulzar” Part-2 (गुलजार शायरी भाग -2)

Poetry Collection of “Gulzar” Part-2 (गुलजार शायरी भाग -2)
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Poetry Collection of “Gulzar” Part-2 (गुलजार शायरी भाग -2)

दोस्तों आज हम आपके सामने पेश कर रहे हैं, प्यार पर हिंदी में 50+ गुलज़ार शायरी। Gulzar Shayari in Hindi। गुलज़ार साहब द्वारा प्रसिद्ध शायरी और गज़ल।
अधिक प्रेम शायरी, प्रेरक शायरी, उदास शायरी संग्रह हमारे साथ बने रहें।

गुलजार शायरी

1-वो मोहब्बत भी तुम्हारी थी नफरत भी तुम्हारी थी,
हम अपनी वफ़ा का इंसाफ किससे माँगते..
वो शहर भी तुम्हारा था वो अदालत भी तुम्हारी थी..

2-यूँ भी इक बार तो होता कि समुंदर बहता
कोई एहसास तो दरिया की अना का होता

3-बे-शूमार मुहब्बत होगी उस बारिश  की बूँद को इस ज़मीन से,
यूँ ही नहीं कोई मुहब्बत मे इतना गिर जाता है!

4-आप के बाद हर घड़ी हम ने
आप के साथ ही गुज़ारी है

5-तुमको गम के जज़्बातों से उभरेगा कौन,  
गर हम भी मुकर गए तो तुम्हें संभालेगा कौन!

6-दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
जैसे एहसान उतारता है कोई

7-तुम्हे जो याद करता हुँ, मै दुनिया भूल जाता हूँ ।
तेरी चाहत में अक्सर, सभँलना भूल जाता हूँ ।

8-तन्हाई अच्छी लगती है
 सवाल तो बहुत करती पर,.
जवाब के लिए
ज़िद नहीं करती..

9-तुम्हारी ख़ुश्क सी आँखें भली नहीं लगतीं
वो सारी चीज़ें जो तुम को रुलाएँ, भेजी हैं

10-“खता उनकी भी नहीं यारो वो भी क्या करते,
बहुत चाहने वाले थे किस किस से वफ़ा करते !”

11-हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते

12-मैं हर रात सारी ख्वाहिशों को खुद से पहले सुला देता,
हूँ मगर रोज़ सुबह ये मुझसे पहले जाग जाती है।

13-आइना देख कर तसल्ली हुई, 
हम को इस घर में जानता है कोई।

14-वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर, 
आदत इस की भी आदमी सी है।

15-मुहब्बत आपनी जगह,
नफरत अपनी जगह
मुझे दोनो है तुमसे ..

16-ज़मीं सा दूसरा कोई सख़ी कहाँ होगा
ज़रा सा बीज उठा ले तो पेड़ देती है

17-मुझसे तुम बस मोहब्बत कर लिया करो,
नखरे करने में वैसे भी तुम्हारा कोई जवाब नहीं!

Gulzar Shayari

18-काँच के पीछे चाँद भी था और काँच के ऊपर काई भी
तीनों थे हम,, वो थे, हम थे, और तन्हाई भी।

19-तजुर्बा कहता है रिश्तों में फैसला रखिए,
ज्यादा नजदीकियां अक्सर दर्द दे जाती है…

20- खुली किताब के सफ़्हे उलटते रहते हैं
हवा चले न चले दिन पलटते रहते है

21- रात को भू कुरेद कर देखो,
अभी जलता हो कोई पल शायद!

22-कोई समझे तो ,,एक बात कहूँ साहब..,
तन्हाई सौ गुना बेहतर है, मतलबी लोगों से..!

23- शाम से आँख में नमी सी है
आज फिर आप की कमी सी है

24- अगर कसमें सब होती,
तो सबसे पहले खुदा मरता!

25- हम अपनों से परखे गए हैं कुछ गैरों की तरह,
हर कोई बदलता ही गया हमें शहरों की तरह….!

26-वो उम्र कम कर रहा था मेरी
मैं साल अपने बढ़ा रहा था

27-मुद्दतें लगी बुनने में ख्वाब का स्वेटर,
तैयार हुआ तो मौसम बदल चूका था!

28- तुम लौट कर आने की तकलीफ़ मत करना,
हम एक ही मुहब्बत दो बार नहीं किया करते!
कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था
आज की दास्ताँ हमारी है

29-जागना भी कबुल है तेरी यादों में रात भर,
तेरे अहसासों में जो सुकून है वो नींद में कहाँ!

30- ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा, 
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा। 

31- हम ने अक्सर तुम्हारी राहों में, 
रुक कर अपना ही इंतिज़ार किया।

32-आप के बाद हर घड़ी हम ने,
आप के साथ ही गुज़ारी है।

33-बहुत अंदर तक जला देती हैं, 
वो शिकायते जो बया नहीं होती।

34- सुना हैं काफी पढ़ लिख गए हो तुम, 
कभी वो भी पढ़ो जो हम कह नहीं पाते हैं।

35- बहुत अंदर तक जला देती हैं, 
वो शिकायते जो बया नहीं होती।

Poetry Collection of “Gulzar” Part-2 (गुलजार शायरी भाग -2)

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मैंने दबी आवाज़ में पूछा? मुहब्बत करने लगी हो?
नज़रें झुका कर वो बोली! बहुत।

कोई पुछ रहा हैं मुझसे मेरी जिंदगी की कीमत,
मुझे याद आ रहा है तेरा हल्के से मुस्कुराना।

हम तो अब याद भी नहीं करते,
आप को हिचकी लग गई कैसे?

दिल अगर हैं तो दर्द भी होंगा, 
इसका शायद कोई हल नहीं हैं।

उसने कागज की कई कश्तिया पानी उतारी और, 
ये कह के बहा दी कि समन्दर में मिलेंगे।

तेरे जाने से तो कुछ बदला नहीं, 
रात भी आयी और चाँद भी था, मगर नींद नहीं।

हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उनको,
क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया।

कहानी शुरू हुई है तो खतम भी होगी
किरदार गर काबिल हुए तो याद रखे जाएंगे..

मुद्दतें लगी बुनने में ख्वाब का स्वेटर,
तैयार हुआ तो मौसम बदल चुका था!

उनके दीदार के लिए दिल तड़पता है,
उनके इंतजार में दिल तरसता है,
क्या कहें इस कम्बख्त दिल को..
अपना हो कर किसी और के लिए धड़कता है।

बदल जाओ वक़्त के साथ या वक़्त बदलना सीखो,
मजबूरियों को मत कोसो, हर हाल में चलना सीखो!

आ रही है जो चाप क़दमों की
खिल रहे हैं कहीं कमल शायद

हसरत थी दिल में की एक खूबसूरत महबूब मिले,
मिले तो महबूब मगर क्या खूब मिले।

कोई अटका हुआ है पल शायद
वक़्त में पड़ गया है बल शायद

कभी तो चौक के देखे कोई हमारी तरफ़, 
किसी की आँखों में हमको भी को इंतजार दिखे।

कभी जिंदगी एक पल में गुजर जाती हैं, 
और कभी जिंदगी का एक पल नहीं गुजरता।

Poetry Collection of “Gulzar” Part-2 (गुलजार शायरी भाग -2)

अफ़सोस बाक़ी ना रहे…

कर जा कुछ ऐसा के जीने का अफसोस बाक़ी ना रह जाए…
कर दिल की हर हसरत पूरी कोई अरमान बाक़ी ना रह जाए…

जिंदगी मे सबको सबकुछ मिले बेशक़ ये ज़रूरी नहीं हैं लेकिन
जो मिला है उसकी भी कहीं कोई चाहत बाक़ी ना रह जाए …

मुसलसल बदलते दौरा से भी मै बख़ूबी वाकिफ़ हूँ “निश़ात”
सँभलना कहीं कोई फिर भी नया तजुर्बा बाक़ी ना रह जाए…

मैंने तंज़ ये दुश्मन-ए-जाँ के तो मुस्कुरा के सह लिए है मगर
देखना अपनो के दिए कोई घाव जिस्म पे बाक़ी ना रह जाए..

जब भी ये दिल उदास होता है,
जाने कौन दिल के पास होता है!

मंजर भी बेनूर था और
फिजायें भी बेरंग थीं
बस फिर तुम याद आये
और मौसम सुहाना हो गया!

कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ
उन से कितना कुछ कहने की कोशिश की

आज मैंने खुद से एक वादा किया है,
माफ़ी मांगूंगा तुझसे तुझे रुसवा किया है,
हर मोड़ पर रहूँगा मैं तेरे साथ साथ,
अनजाने में मैंने तुझको बहुत दर्द दिया है।

आँखों से आँसुओं के मरासिम पुराने हैं
मेहमाँ ये घर में आएँ तो चुभता नहीं धुआँ

यूँ भी इक बार तो होता कि समुंदर बहता
कोई एहसास तो दरिया की अना का होता

आप के बाद हर घड़ी हम ने
आप के साथ ही गुज़ारी है

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
जैसे एहसान उतारता है कोई

कोई न कोई रहबर रस्ता काट गया
जब भी अपनी रह चलने की कोशिश की

इतने लोगों में कह दो अपनी आँखों से,
इतना ऊँचा न ऐसे बोला करे, लोग मेरा नाम जान जाते हैं!

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