My Old hindi Poetry Your Quote ollection (Part-2)

My Old hindi Poetry Your Quote ollection

बेशक,,,,,
जब तक जिंदा है जज्बात-ए-इश्क,,
वो कच्चे धागे से बंधे चले आएंगे,,,,

ऐ सनम,,,,
बता तुझे क्या मिला हमसे खफा होकर,,,
सुना है तू भी तन्हा है हमसे जुदा होकर,,,,

मेरा चाँद मुझे आया था,,, नजर,,,,
एक लौ सी जला कर सीने में
छुप गया न जाने किधर

जख्म है कि दिखते नही…मगर,
ये मत समझिए कि दुखते नही…
आदमी अच्छा था….ये लफ्ज
सुनने के लिए मरना पडता है..

जिस्म में बाकी हैं,,, कुछ चन्द सांसें,,,
हो जायेगी ये रूह फना,,
कभी तो कहकशां में मिलो,,,,
कहीं बाकी न रह जाएं बातें,,,

न रंग था,,, न थी रंगोली,,,,
थीं तो बस तेरी यादें,,,
जिनसे हमनें अपनी पलकें भिगो लीं,,,,

तुम्हारी आँखों में हर पल मेरा बीत जाता है ,!
इस जहाँ से तुमको चुराने को जी चाहता है ,,,!!
सोचता हूँ !!!!!,,,,!!!!!
इस जहां से छुपा कर रख लूं तुमको अपने दिल में ,!
इसी ख्यालात में हर ख्वाब बीत जाता है ,,,!!

तेरी ख्वाहिशों की सर-परस्ती में
खुद को जला आए यादों की बस्ती में,,,,

एक आह भरी होगी,,,
हमनें न सुनी होगी,,,,
जाते जाते तुमनें,,
आवाज तो दी होगी,,
हर वक्त यही है गम,,
उस वक्त कहाँ थे हम,,
कहाँ तुम चले गए,,
कहाँ तुम चले गए,,,

साहब,,,,,,,
“तन्हाई” इस कदर रास आ गयी अब मुझे कि !
अपनी सांसों की आवाज भी भीड़ सी लगती है !!

तन्हाई भी थी,, और दूर तक
खामोशियों का शोर था !
उसे पुकारता भी कैसे ?
जो मेरा,होके कहीं और था !!

पल पल बिखर रहा हूँ,,,,
दिल-ए-अरमां बेशुमार हैं
और वक्त बहुत कम,,,,,,

जर्रा जर्रा हंसता है,,,मेरी बेबसी देख कर,,,,
इनको भी मालूम है,,,कितनी खाक छानी है
बस एक तेरी खातिर,,,,,

बगावत कर चुका हूँ,,,
उस खुदा से,,,
कभी जिसका मुरीद हुआ करता था ,,,,, तुम्हारे लिए

My your quote hindi poetry

उलझनों में गुजर रही है,,,
धागों सी है ये जिंदगी,,,,या
जिंदगी से हैं ये धागे

हाँ,,,,
आज भी याद करता हूँ,,, तुमको,,,
तुम पर न सही,,, मेरी यादोँ पर तो मेरा हक है ना,,

इरादों से भी क्या दूर जाना ,,,,,,
जब जज्बात वादों से जुड़े हों,,,,,

वो,,,,
देखता है मुझे अपनी यादों में,,,
वो देखता है मुझे अपनी यादों में
और हम,,,
हर पल मांगते हैं उसे अपनी फरियादों में
के कभी तो मिलेगा वो मुझको,,,,
कभी तो मिलेगा वो मुझको,,,,
इसी पर काट रहे हैं जिंदगी,,उसको दिए हुए वादों में

गर मुक्कमल हुई मुलाकात तो,,,
हमें निगाहों की गिरेबानी में सम्भाल लेना,,,
क्यूंकि इश्क तुम्हारी इन निगाहों से है

कुछ खेरियत
भेज तो अपने वफा-ए आलम से,,
इन्तजार कर रहे हैं
इश्क-ए-वफा के गुलिस्तां में हम,,,

वो क्या किसी की वफा पर अब एतराम करे,,,
जिससे मौत भी खुद बेवफाई पर उतर आए,,,,

तुम से मेरी चाहत थी,, तुम से मेरी राहत थी,,
सब तुम पर ही तो लुटा दिया,,,,
तुम से मेरी बातें थीं,,, तुम से मेरी सांसें थीं,,,
तुम्हारी ही खातिर खुद को मिटा लिया,,,,

जब से सुने हैं तेरे हाल-ए-सितम,,,
तब से जी रहे हैं घुट-घुट कर हम,,,

कुछ तो मुफलिसी सी है तेरे वादों में,,,
तो कुछ बरकत सी है मेरे इरादों में,,,
अब तो यही ख्वाब मुकम्मल है ,,,
तरी खातिर फना हो जाऊँ तेरी यादों में,,,,

ये फोन,,,मुझसे हरपल कुछ कहता है
तेरी आवाज का इंतजार आज भी इसे रहता है,,,

मुहब्बत तुमसे कल भी थी,,,
चाहत तुम्हारी आज भी है,,,
इबादत तुम्हारी कल भी थी,,,
इनायत तुम्हारी आज भी है,,,
ख्वाहिश तुम्हारी कल भी थी,,,,
आजमाइश मेरी मुहब्बत की आज भी है,,,

होने को यूँ तो शहर में अपना मकान था !
मगर नफरत की ईंटों दीवार के दरमियान था !!

My hindi Poetry Collection

इंतजार में हूँ तेरी राहत-ए-वफा के,,
अब तो शिरकत-ए-आलम में आवाज दे,,,

ए मेरे रहनुमा-ए-इश्क अब तो एक सदा कर,,,
बुला कर इश्क-ए-आलम में,,,तू मुझे फना कर,,

सवाल ही नहीं दुनिया से अभी मेरे जाने का !
मुझे यक़ीन है जब तक किसी के आने का !!

अब यकीन हो गया,,, मुझे भूल चुके हैं वो,,,,, वरना !
वफा न सही,, जफाओं का सिलसिला बदस्तूर रखता !!

तिनका तिनका बिखर रहा हूँ,,,मैं
तेरी यादों की आँधियाँ मेरा वजूद मिटा रही हैं,,,,

न उसने पत्थर मारा,,, न ही उसने
खंजर से वार किया,,,
उसने तन्हा छोड़ा,,,उसकी यादों ने,
ये दिल-ए-दर्पण तार तार किया,,

वो पसन्द करता अपनी खुदनुमाई को
अब खुदा हाफिज, इस रुसवाई को
पैगाम है ये तुम्हारी वस्ल-ए-जुदाई का
मौत अंजाम है हमारी आशनाई का

बे-दिली का जो हाल फरमाते हैं
कर लिया उन्होंने कहीं और ठिकाना अपने दिल का

उंगलियाँ तार-ए-गरीबाँ में उलझ जाती हैं
सख़्त दुश्वार है हाथों से दबाना दिल का

जो तुम अक्सर कहते हो
गर है मुझसे इतनी नफरत यूँ ही बेवजह !
तो क्यूं रखते हो हमें,,, आंखों में काजल की तरह !!

नया क्या हुआ,,,,
बर्बादीयों के जख्म तो हम पहले भी सेक रहे थे,,, अपने,,,
अब किसी नें उनपर नमक नाम का मरहम लगा दिया तो क्या,,,,

चल अकेला

ये जीवन है,,, एक छोटा सा मेला,,,
तू आया था यहाँ अकेला,,, तो चल अकेला !
खुशियों में तो सब साथ थे,,,
दुखों को तूने खुद है झेला,, तो चल अकेला !!
बचपन में सबके साथ था तू खेला
बुढ़ापे में रहना है तुझे अकेला,, तो चल अकेला !
जब थी तेरी रोशन दुनियां, तेरे पीछे था रिश्तों का मेला
पल भर के अंधेरे में दौड़ गया तेरा साया चेला
तू चल अकेला,,,तू चल अकेला

love YourQuote hindi Poetry Collection

यही तमन्ना है,,
तेरी यादों में,,,,पूरी तरह जल जाऊँ,,,,
तुझे याद करते करते
एक पल में पिघल जाऊँ,,,,

वफा के नाम पर तुम,,, क्यूँ सँभल के बैठ गए !
तुम्हारी कोई बात तो नहीं की,,,
हमने तो कुछ पुराने किस्से छेड़े हैं !!

अब के मांगी है हमनें भी ये दुआ रब से ,,,,!
जो भी इस शहर आए वो सितमगर हो जाए ,,,,!!

क्या करूँ;;;;
गुल ही नहीं हैं,,,,, मेरे गुलशन में,,,,
तो गुलाब दिवस को कैसे
गुलजार बनाऊँ,,,

हर ख्वाब मेरा,,,मुझसे यूँ रुठ गया,,,,
एक गुलाब था मेरा,,,, वो भी डाल से टूट गया,,,

फिरते हैं
कब से दर-बदर अब इस नगर अब उस गली !
एक दूसरे के हमसफर,
मैं और मेरी बेफिक्र आवारगी !!

क्यूँ पशेमाँ हो अगर वादा वफा हो न सका !
सुना है कहीं वादे भी निभाने के लिए होते हैं !!

हम////
खो चुके हैं खुद को बेबसी की भीड़ में
और दुनियां हमें
किसी की तलाश से रोकती है,,,

इल्जाम भी किस हवा के झोके को दें,,,,यारों
वफा के कागजी आशियाँ भी तो हमनें की सजाये थे

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2 thoughts on “My Old hindi Poetry Your Quote ollection (Part-2)

  • April 4, 2021 at 3:17 pm
    Permalink

    har khwab mera… mujhse u Ruth gaya
    ek tha gulab mera wo b daal se tut gaya
    wah wah 🥲

    Reply

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