My old hindi poetry Your Quote Collection (Part-1)

My My old hindi poetry

#Hangover
शराब सी हैं मेरी मुहब्बत की वो यादें,,!
शाम होते ही,, महफिल-ए-तन्हाई में,,!!
परवान तो चढ़तीं है,, पर कमबख्त,,!
सुबह दर्द के आलम से सराबोर कर देती हैं,,!!

प्रीत कि बातें भी भूल जाओगे,,,
जब मोह के धागे से प्रेम की सूली पर झूल जाओगे

अब तो रूह भी अलविदा कर रही है,,
जो नहीं कर सकीं अलविदा वो, तेरी यादें,,
और तुझसे की मेरी फरियादें

Old hindi poetry

तू ही बता
ए-जिंदगी,, तुझे आबाद कैसे करूं,,,,
तू देती नहीं
पता अपना,, तुझे बेड़ियों से आजाद कैसे करूँ,,,,

उठा के देखा जो सर,, फलक की ओर,,
तो
एहसासों की बारिश नें मेरी वफा का दामन सराबोर कर दिया,,,,

गर होता इश्क तुमसे,,,
हर शख्स से तुमको छुपा लेता,,
बयां करके राज-ए-दिल सारे,,,
तुमको अपना बना लेता,,,

चिराग जलाने की रस्म-ओ-रवायतें पुरानी हुईं इस जमाने में,,,!
अब तेरे शहर के लोग,दिलों को जला कर उजाला किया करते हैं,,,!!

तूफानों से, नजरें मिलाकर, देख लिया,,,
हर एक आग से टकराकर, देख लिया।
चाँद को ड़र है,, आखिर उसका क्या होगा,,?
जो हमनें ऊपर हाथ उठाकर, देख लिया ।।
हर बार उन्होंनें,,, पीठ में खंजर घौंपा है,,
हर दुश्मन को गले लगाकर, देख लिया !
किसे पड़ी है, मेरे मन की सुने,,
ऊपर तक गुहार लगाकर, देख लिया !!
हो जुनून, तो, आसमान भी झुकता है !
ये हमनें आजमा कर, देख लिया !!

कोई बिन हाथों के मरहम लगा देता है !
कोई मुस्कुरा कर गम बढ़ा देता है !!

खौफ तो खत्म हुआ,, अब सबसे जुदा होने का,, !
अपनी ही तन्हाई में हम,,मसरूफ रहा करते हैं,, !!

हमारी कोशिश कभी विफल न हुई,,,,,
बहुतों ने साजिश की हमें हराने की,,,
पर,,,,,,, आज तक सफल न हुई,,

देखा है मैंने
रुतबा खामोशियों का होता है !
अल्फाज तो बदल जाते हैं हैसियत देख कर !

My yourquote hindi poetry
My old hindi poetry Collection (Part-1)

हकीकत बस इतनी ही थी,,,
उनको चाय खत्म करनी थी,,,
और हम
शाम-ए-शहर उनके कप को,,,,
गजलें सुनाया करते हैं,,,,

याद करते हुए ,, वो हर एक पल तेरा ,,,,,
कटती है हर शाम,,,, हर दिन मेरा,,,,,
लफ्जों की ये बात नहीं,,, ये
तेरी यादों का है इनाम मेरा,,
हर वक्त मचल जाता है,,, ईमान मेरा,,,,
लबों पर जब भी आता है,,, नाम तेरा,,,
खुश हूं,,, तेरी यादों के झरोखे से झांक कर,,,,
एक तू ही है,, इस दिल में महमान मेरा,,
न वक्त की कसौटी है,,न कोई पैगाम तेरा,,,,,
करना है अब तुमको कायम अंजाम मेरा,,,,

जब भी,,!!
छूती हैं,,,,ये बारिश की बूंदें,, माथा मेरा,,,,
पूछतीं हैं,,,ये मुझसे हरपल,, नाम तेरा,,,,
ये कहती हैं,,
कौन है वो ? जिसके लिए जज्बात तुझमें अब तक है,,,
कौन है वो ? जिसका,,तेरे माथे पर स्वाद अब तक है,,,
बता ए राही,,
कौन है वो ? जिसकी मुलाकात आँखों में अब तक है,,,
कौन है वो ? जिसकी याद आंखों में अब तक है
आखरी कौन है वो ? जिसके लिए तू उदास अब तक है,,,
क्या बोल दूँ,,, इन बूंदों को!!
के तू,,, है,,, वो

रंजिशें बहुत हुईं,, साजिशें बहुत हुईं,,,
जमाने के सितम की बारिशें बहुत हुईं,,
हो जाएं रुसवा जिंदगी से,
ऐसी ख्वाहिशें बहुत हुईं,,,

आखरी ख्वाहिश बस इतनी सी है,,
जब आये मेरा वक्त नजदीक,,
मेरे सामने उनका चेहरा हो,,,
जब बन्द हो ये आंखें बस
उनकी आंखों का पहरा हो

Old hindi

नसीब की बारिश कुछ इस तरह होती रही मुझ पर..
ख्वाहिशें सूखती रहीं और पलकें भीगती,,!!!

वो
अक्सर हमसे मुहब्बत का इन्तिकाम लिया करते हैं,,,,,
हम
हर लम्हा इस इन्तिकाम का इम्तिहान दिया करते हैं

उसनें जीने का कोई और बहाना कर लिया,,
जब खेल लिया दिल से,, तो हमसे किनारा कर लिया।

मुझे रिश्तो की लंबी कतारोँ से मतलब नही,,
कोई दिल से हो मेरा, तो एक शख्स ही काफी है..।

My old hindi poetry Collection

हादसे इतने होने लगे हैं मेरे दामन मे,
कि,,,
यादों को निचोड़ो तो खून ही निकलता है.

क्या मजाल दुनिया की,,कि दे दे कोई फरेब !
यहां सब अपनी ही आरजू के शिकार हुए हैं !!

खफा है हमसे ये दुनिया हमारा है कुसूर इतना !
समझदारी से हम कुछ पल सुहाने ढूँढ़ लेते हैं !!

महसूस तो आज भी करता हूँ,,,, तुम्हें
बस वो पहले से एहसास कहीं गुम है,,,

क्या समझेंगे वो मेरा दर्द,,,,
जो
खुद दर्द से कभी रु-बरु न हुए

तिश्नगी मेरा मुकद्दर है शायद,,,
तो क्या,,!!!
मैं परिन्दों को भी प्यासा नहीं रहने देता !!

जिंदगी में वही बेताब हुआ करते हैं !
जिनकी पलकों में किसी के ख्वाब हुआ करते हैं !!

मैं अक्सर तोलता हूँ ख्वाब और सिक्के तराजू में !
खुशी पाने में इक सिक्का हमेशा कम निकलता है !!

बस एक सवाल तुमसे,,,
चलो तुम्हारी जिंदगी में एक राग और सजा दूं,,,
अगर तुम खुश हो, तो अपनी खुशियों में भी आग लगा दूँ,!!??

जानता हूँ,,,,
परछाई सी हो तुम,, छू भी नहीं सकता तुम्हें,,,,
फिर भी///
तुम्हें पाने को दौड़ता रहता हूँ,,, हरपल मैं,,,

कोई बात करने वाला था,,,
कोई मुलाकात करने वाला था,,,,
हम बेखबर थे,,,,
हमें तन्हा छोड़कर,,,
वो मौत से बद्दतर हमारे,
हालात करने वाला था,,,,

कमाल तो तब हुआ
जनाब!!!!!!
रुखसत वो खुद ले गये पनाह-ए-मुहब्बत से
और
बेरुखी का हिजाब हमको पहना गए,,,,

मुहब्बत छ्त की बीमारी तुझे बरबाद कर देगी
बिठायेगी वो नज़रो पे फ़िर नज़रन्दाज़ कर देगी

नजरअंदाज करने का अंदाज भी बड़ा निराला था!!!
जिस तीर से घायल किया था हमको,,
उसी तीर से बड़ी बेदर्दी के साथ हमें दिल से निकाला था।

बेताबी क्या होती है,पूछो मेरे दिल से,,
तन्हा तन्हा लौटा हूं मै तो भरी महफिल से।

देखी जो सूरत उनकी फिर से,,
आंखों में अब्र से उरत आया है।

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मैं एक टक ताकता रहा झरोखे से उनकी डगर,,,,
बड़ी मासूमियत से निकल रही थी मेरी जान,,,
होकर मुझसे बेखबर,,,

जो बात घर में हुई थी, वो अगर बाजार में है,,
कोई सुराख तो यकीनन किसी दीवार में है….।।

कैद में तो हम हर लम्हा रहे हैं
बस अब फर्क सिर्फ इतना है,,
पहले तेरी यादों में थे,,,
अब सरकारी फरियादों में हैं,,

चल कलम
तुझे भी एक खिताब दूँ,,,,
मिले हैं जो जख्म जिंदगी से,,,
उनको बेहिसाब लिखूँ,,,,

नफरत करने को!!!
वो मजबूर करना चाहते हैं हमें,,,,
पर वो ये क्यों भूल जाते हैं,
आज भी
हम महसूस कर सकते हैं उन्हें,,

उस बारिश नें भी अच्छा खेल रच डाला!!!
भीगने वाली थीं जो आंखे उनको देख कर,,
आंसूओं से पहले ही उसने आंखों को भिगो डाला।।

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