My Latest Poetry Collection (Part-2)

my latest Poetry Collection

साथ हमारा अधूरा सही,,
मगर
मुहब्बत तुमसे पूरी थी,,,,

हम तो थोक में दर्द खरीद बैठे हैं,,
तुम फुटकर में तन्हाई क्यूँ थमा रहे हो,,,

इन अश्कों के मकसद,,
कुछ इस तरह छुपा लेते हैं।
जब भी निकलने को होते हैं,,
हम मुस्कुरा लेते हैं।।

मेरी मंजिलें मुझसे ही खफा हैं,,
इनका हर किस्सा तुमसे ही जुड़ा है।

गौर फरमायें
उनसे दूरियां चन्द कदमों की हैं,,
और सफर मेरा सदियों का।
ये मेरी मजबूरियाँ!!!

हर बार तन्हा लौटा हूँ, रिश्तों के मेलों से,,
जब भी जिस को चाहा, उसनें किनारा कर लिया,मुझसे

खुद से ज्यादा, मैं तुझमें खोया हूँ,,
तुझे याद कर-कर के हर रात रोया हूँ।

कैद
नहीं कर सकता तुम्हें,,
प्रेम है, तुमसे कोई खेल नहीं।

उड़ने को बैठा है,, वो परिंदा भी,,
जिसकी खातिर,,,,
हमनें सोने का पिंजरा बनवाया था।
न कभी कैद किया, न कभी पंख कटे,,
हमनें सिर्फ मुहब्बत का दाग लगाया था।।

पता है,!!!
अक्सर हम उनको जान कहा करते थे,,
मगर हम ये भूल गए।
के जान भी एक दिन चली जाती है,,
और वो चली गयी।।

बढ़ गया था कद प्यास का,,
दरिया देख कर !
हम पलट कर वापिस आ गये,,
दरिया को प्यासा देख कर !!

कलियाँ भी खिल उठती है,,,
जिनके खुल कर खिलखिलाने से।
न जाने कितने दर्द दिल में छुपाये बैठे हैं,,
इस बेदर्द जमाने से।।

होता कुछ नहीं!!!
जब भी तुम याद आते हो,,
होता कुछ नहीं!
बस आंसू निकल आते हैं, आँखों से,,
सिर्फ जान ही नहीं निकलती मेरी!!

सोता तो कमबख्त रोज हूँ,,
मगर नींद तो उस दिन पूरी होगी।
जब सर उसकी गोद मे रख कर सोऊंगा!!!

ये इंडिया है जनाब!!!
यहां किसी के जज्बातों की कीमत नहीं,,
यहाँ लोग अपने सपनों को भी!!
ऊंची कीमत पर दूसरों से खरीदा करते हैं।।

your quote poetry collection

दिल भी आपका पाकसाफ है,,,,
आपके दिल से हर गलती माफ है,,,
जब भी देखता हूँ तुमको
दिल से एक मिलने की फरियाद आती है,,,,
करूँ में कुछ भी सिर्फ आपकी ही याद आती है,,,
सँजो लेता हूं आपके साथ बिताये हर लम्हे को,
अपनी यादों के धागों में,
बड़ा खुश नसीब हूँ मै,, जो आप आये हो
हमारे नसीब के भागों में,,,
कभी भुला न सकूँगा आपको,,
इन बदलते जहानों में
सिर्फ आपको ही गुनगुनाता रहूंगा
अपने फसानों में,

अपने हर गम को अपनी मुस्कान में छुपा लेती है,,,
जब भी उठता है कोई दर्द तो,,,
मन्द मुस्कुराहट से होंठों में दबा लेती है,,,
आते हैं आंसू आँखों में जब भी यारों के बीच,,,
आंख में कुछ गिरने की बात बना लेती है,,,,
कोई लाख पूछ ले उससे उसके दर्द के बारे में,,,
ऐसा कुछ नहीं, ऐसी कोई बात नहीं,
करके हर बार ताल देती है,,
वो बहादुर है, इसमें कोई शक नहीं,,,
कुछ पल को लड़खड़ाती है, फिर खुद को सम्भाल लेती है,,

Dear ”मोहतरमा”
कभी अपनी हिरनी सी आंखे खोल के तो देखो,!!!
हमारा तनिष्क भी तुम हो और इश्क भी तुमसे है,,,

अब मान भी लो,,,!!!!
मेरी मुहब्बत तुमसे दिए और बाती की तरह है,,,
खुद को जला देंगे बाती की तरह
सिर्फ,!!!!
तुमको रोशन करने की खातिर,,,

सुनो,,,,तुम,,!!!!!
गुजर जाने दो ये जिंदगी अपनी पनाहों में,,
बचपन कटा तुम्हारी निगाहों में।
कटी जवानी इन जुल्फों की छाओं में,,
यूँ ही काट लूँगा ये सर्द बुढापा भी।।
बस कर तुम्हारी इन गर्म बांहो में,,
बहुत मुहब्बत है तुमसे।
एक इजाजत दो,,
गुजर जाने दो ये जिंदगी अपनी पनाहों में।।

नहीं सम्भल पाया!!!
रोका था दिल को अब तक,,
के कोई तकरार अब न हो।
मूंद रक्खी थीं अब तक आंखे,,
किसी से प्यार अब न हो।।
पर हो गया!!

My poetry Collection

सच तो ये है,,!!!!!
कि नाकाम हसरतों के काफिले है,,,
मेरी आंखों से जो लहू बन के निकले हैं,,,,

बहुत देर हो चुकी होगी उस दिन,,,,
जिस दिन तुम मुझे समझ जाओगे,,,,,
दर-दर भटकोगे, मेरी फरियाद में,,,
अपनी इन आंखों से सिन्दूरी आंसू बहाओगे,,,
करोगे लाख जतन हमसे मिलने के,,,
हमारी एक झलक देख न पाओगे,,,,

कि जैसे टूटना नाकाफ़ी था,,,
मेरे ज़र्रे भी ऊँची कीमत पर बिके।

नाकाफी ही होता है,,
यूँ टूढ कर बिखर जाना।
एक दस्तूर बन गया है, दुनियां में,,
टुकड़ों का ऊंची कीमत में बिक जाना।।

अब तो नींद भी अपनी हवा हुई,,,
ए-इश्क!
…………..ये तेरी कैसी सजा हुई।।।।

तुम्हारी आँखों में हमें दिल,,
का दरिया नजर आता है,,
तुम में हमें जीने का जरिया नजर आता है।।

सुनो!…….
एक काम कर सकते हो,,
इस दिल की जान बन सकते हो।
न जाने कब से खाली है,,
मेरे दिल का ये आशियाना।।
क्या तुम इस आशियाने के,,
ताउम्र मेहमान बन सकते हो।

शुक्रिया दिल से!!!!
आपने एक हसीन शाम दी,,
कुछ जिंदगी हमारे नाम दी।
रहेगी याद ताउम्र हमें,,
ये बातें जो हमारी दोस्ती के नाम की।।
आप हमारे दिल में हो,,
एक शबनमी शाम सी।
मुहब्बत भी गुलाम हो जाए,,
सिर्फ आपके नाम की।।

हाँ!!!!!!!
बन गया हूँ, सपनों का सौदागर,,
टूटे सपनों के महल मुझ पर देखे न गए।

मेरी हसरतों की भूख को,,
एक निवाला चाहिए।
असल में मेरी रूह को,,
समझने वाला चाहिए।।

मुकम्मल हो जाती है, मेरी जिंदगी,,
जब तुम फक्र से सर उठाते हो।
मन्द मन्द मुस्कुराते हैं, मेरे लब,,
जब तुम दिल से मुस्कुराते हो।।

घोल दो!!
अपनी मुहब्बत इस प्याली में,,
सुबह की चाय का इंतजाम हो जाए।
छू लो अपने अधरों से, इस पेय को,,
तो शक्कर भी आपकी मिठास से नीलम हो जाए।।

मैं
सबको प्रिय तो हूँ,,
परन्तु,,अप्रियजनों की सूची में,,

My YourQuote Poetry collection

कहीं रूह का होता है तो,, कहीं जिस्म का होता है,,,
इस जहाँ में इश्क़ भी कमबख़्त,, दो किस्म का होता है.

#Contact
लिस्ट भले ही हमने भर डाली है,,,
मगर रिश्तों से जेब अब भी खाली है,,,,

उसने!!!!!
बड़ी बे-कदरी से फेंका हूँ,, मै
के अब तक न मुझे तराशा गया,,,
शायद बे-मोल थी मेरी जरूरत,,
के अब तक न मेरा मोल आंका गया,,,

अब तो टुकड़े बाँटते फिर रहे हैं,,
दिल तो एक ही था,, जो टूट गया।

हौसले भी बुलंद हैं हमारे,,
तेरे कहकशां से ऊँची उड़ान भी है।
मगर जुड़ा हूँ अपनी सरजमीं से,,
क्यूंकी इस मिट्टी से जुड़ी एक पहचान भी है।।

चलो सुना देंगे तुमको भी,,
अपने दिल की धड़कनें।
एक बार उन्हें देख कर,,
पहले की तरह इसे धड़कने तो दो।।

दम तोड़ चुकी हैं,,
मेरी ख्वाहिशें।
सबको मेवा मिलेगा,यारों सब्र करो,,
बस मेरा जनाजा उठने की देर है।।

पुराने ख्वाबों के बाग उजाड़ के,,
यूँ ही नए बीज बोए नहीं जाते।
मुहब्बत के तोहफे में दिए फूलों को,,
बड़े अदब से चुना जाता है।।

हर सफर में हम सफर साथ हो ऐसा मुमकिन कहां,,
हवाओं के शोर से भी अक्सर कुछ लोग घबरा जाते हैं।

तू धूप भी नहीं थी, और छा गयी,,
हम अब्र भी नहीं थे, और बरस गए।
तुझे पता है तेरे बाद क्या हुआ!!!
दरख्त बुझ गए, जिराग कट गए,,
झिझक रहे थे रोशनी में।
झिझक रहे थे रोशनी में,,
और फिर दीये को फूक मार कर भी डर गए।।
क्या खबर कोन था वो!!
और क्या मेरा लगता था,,
जिससे मिलकर हर शख्श बुरा लगता था।।

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