Holi Poetry- the festival of colors

Holi poetry- the festival of colors

Holi - the festival of colors

Holi – ‘रंगों के त्यौहार’ के तौर पर मशहूर होली का त्योहार फाल्गुन महीने में पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है।
तेज संगीत और ढोल के बीच एक दूसरे पर रंग और पानी फेंका जाता है।
भारत के अन्य त्यौहारों की तरह होली भी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। 
होली प्राचीन हिंदू त्यौहारों में से एक है
होली का वर्णन जैमिनि के पूर्वमिमांसा सूत्र और कथक ग्रहय सूत्र में भी है।
प्राचीन भारत के मंदिरों की दीवारों पर भी होली की मूर्तियां बनी हैं।
ऐसा ही 16वीं सदी का एक मंदिर विजयनगर की राजधानी हंपी में है।
इस मंदिर में होली के कई दृश्य हैं जिसमें राजकुमार, राजकुमारी अपने दासों सहित एक दूसरे पर रंग लगा रहे हैं।
कई मध्ययुगीन चित्र, जैसे 16वीं सदी के अहमदनगर चित्र, मेवाड़ पेंटिंग, बूंदी के लघु चित्र, सब में अलग अलग तरह होली मनाते देखा जा सकता है।

यह कहानी भगवान विष्णु के अवतार भगवान कृष्ण के समय तक जाती है।
माना जाता है कि भगवान कृष्ण रंगों से होली मनाते थे, इसलिए होली का त्योहार रंगों के रूप में लोकप्रिय हुआ।
वे वृंदावन और गोकुल में अपने साथियों के साथ होली मनाते थे।
वे पूरे गांव में मज़ाक भरी शैतानियां करते थे।
आज भी वृंदावन जैसी मस्ती भरी होली कहीं नहीं मनाई जाती।
होली वसंत का त्यौहार है और इसके आने पर सर्दियां खत्म होती हैं।
कुछ हिस्सों में इस त्यौहार का संबंध वसंत की फसल पकने से भी है।
किसान अच्छी फसल पैदा होने की खुशी में होली मनाते हैं।
होली को ‘वसंत महोत्सव’ या ‘काम महोत्सव’ भी कहते हैं।

Holi - the festival of colors

Holi Poetry- the festival

1- उसे दिल की बात बताने को मन करता है,
ना चाहते हुए भी चाहने को मन करता है।
मन बड़ा है उसके गालों को चूमने का पर,,,
बस आज तो उसे रंग लगाने को मन करता है।।

2- बैर भाव से दूर रखे,,,
चित्त शांत बोल।
देख मीठी बोली,,
है रंगों का पावन अवसर,
और जीत अच्छाई की,
ये प्यार का त्यौहार होली।।

3-फीके पड़े इस जीवन में आज आओ कुछ हम रंग भरे,,,
हरा गुलाबी लाल और पीला आज तुमको हम रंग दें नीला।
मिल कर खाएं गुजिया मीठी दही भल्ले में चटनी है तीखी,,,
थोड़ा सा संग हम मुस्कुराए आओ मिल कर होली मनाएं।।
जीवन में नए रंग भर कर अब दुखों को अपने मलहम लगाए,,,,
गले लगा कर आज हम तुमको होली की दें ढेरों शुभकामनाएं।।।।।।

4-तुम करना रंगों सा प्यार होली में,,,,
ना करना कोई व्यापार होली में।
मिलते हैं यारों से यार होली में,,,
सब बाहर निकल आना मन के द्वार खोलकर।।
मंदिर , मस्जिद , गिरजाघर , गुरुद्वारे,,,,
इन सब के पार मिलना तुम होली में।
बे रंग को भी तुम रंगना होली में,,,
रंगों का उत्सव करना तुम होली में ।।

You do love like colors in Holi,
do not do any business in Holi..
you meet friends in Holi,
everyone comes out to open the doors of the mind..
temples, mosques, churches, gurudwaras,,,
Across all of these meet them all in Holi…
You will color someone colorless in Holi,
you celebrate the colors in Holi.

Poetry the Festival of colors Holi-

Holi - the festival of colors

5- कुछ टूटी फूटी चीजें होगी दिल में,,,
होगी कुछ मायूसियाँ।
कुछ बेकार से ख्याल होगें,,,
कुछ चुभती परछाइयां।।
जलाकर सब कुछ यह,,,,
बाँध ले दिल को अपने प्यार की मोली।
क्योंकि आज दहन भी उत्सव बना है,,,
आज है होली।।

There will be some broken things in the heart ,,,
There will be some disappointments.
Will take care of something useless ,,,
Some piercing shadows.
Burn everything,,,,
Tie the heart to your love.
Because today, burning has also become a festival,
Today is Holi.

6- मथुरा की खुशबू, गोकुल का हार, वृन्दावन की सुगंध, बरसाने की फुहार।
राधा की उम्मीद, कान्हा का प्यार, मुबारक हो आपको होली का त्यौहार !!

7- आओ चलो होली खेलते है ।

रंग बदलती दुनिया को एक रंग में रंगते है,,,
फीके हो चुके इन चेहरों में नया रंग भरते हैं।
आओ चलो होली खेलते है।

सुख चुकी स्नेह की पिचकारी में प्रेम का पानी भरते है,,
चेहरे से ज्यादा गहरे रंग से इस बार मन को रंगते है।
आओ चलो होली खेलते है।।

प्रेम का प्रहलाद बचा कर ईर्ष्या की होलिका दहन करते है,,
सारे भेद मिटा कर इस बार सब एक रंग में रंगते है।
आओ चलो होली खेलते है।

मलिन तो होने है वस्त्र रंगों से पर मन को स्वच्छ करते है,,
इस बार प्रेम की होली खेलते है।
आओ चलो होली खेलते हैं ।।

8- यूं तो हजारों रंग देखे दुनिया के,,,
पर मुझे तो मेरा बेरंग होना पसंद आया।

9- तुम रंग लगाना होली में,,
हाँ ! तुम अपना ढंग वही रखना।
पर रंग बदलती दुनिया में,,,
तुम अपना रंग वही रखना।।

10- तुम मनालो आज होली,,,
हमारा क्या ?
हम तो रोज अपने अरमानों का दहन करतें है।

You celebrate Holi today,,,,
what about us?
We burn our aspirations every day….

The Festival poetry- holi

11- खफ़ा खफ़ा न रहो आज यार होली में,,
मिलो भुला के शिकायत हज़ार होली में।
बधाई हो सभी को रंग भरी ये होली,,
बरसा रही है, हवा खुशियों की फुहार होली में।।
रहे न आज अछूता कोई भी रंगों से,,
मलो गुलाल कि आए निखार होली में।
मनाओ होली का त्योहार हर्ष उल्लास से,,,
गले लगा के करो दिल से प्यार होली में।।
न मनमुटाव न झगड़े न आपसी रंजिश,,,
दहन बुराई का होवे हजार होली में।

Don’t be upset, today, in this Holi,
Meet and forgot the all complains in this holi.
Congratulate to everyone, with full of colors in this Holi,
The wind is raining, spray of happiness in this Holi.
Nobudy remain untouched by any color today,
Rub Gulal to come out Sparkle in this Holi.
Celebrate the festival of color Holi with joy & glee,
Hug everyone and love them with your heart in this Holi.
Neither pique, nor quarrels, nor mutual rivalry ,,,
thousand of evil things burns in this holi.

12- me dhundta hu usko en holi wale rango me
wo fir mile mujhe uhi rang birangi hal chal me
wo chera uska gulabi me har rang se bhar du
me bhar pickari rang ang ang rang du
jala du,,,teri meri galatfhemiyo ko is holika dehen me
me mita du ye duriyo fir es rang bhare mosam me
wo jab nikle rang saja ke mere naam ka apne mathe me
me ful sare barsa du uski raho me..

Holi – the festival of colors

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