Beautiful Mothers day poetry (special epic hindi poetry)

Mothers day poetry-

Beautiful mothers day poetry

करने को पूरे सबके सपने,,
अपने अरमां सूली पर टाँगती है।
इस जहां में इक माँ ही है,,
जो सबकी सलामती की दुआ माँगती है।।

मेरी माँ है वो जो मुझे हसाती – दुलारती,,
त्याग और मेहनत से मेरे जीवन को सवारती।
चाहे वह खुद सो जाये भूखे पेट,,
लेकिन मुझे खिलाती है भरपेट।।
उसकी ममता की नही है कोई सीमा,,
उससे सीखा है मैने यह जीवन जीना।
मेरा सुख ही उसका सुख है,,
मेरा दुख ही उसका दुख है।।
रहती है उसे सदा मेरे तरक्की की अभिलाषा,,
अब मैं भला क्या बताउ माँ की परिभाषा।
मेरे जीवन के संकट रुपी धूप से वह टकराती है,,
मेरे संकट परेशानियों में वह मातृ छाया बन जाती है।।
वह है मेरे हर चिंता को दूर करने वाली,
वाकई में मेरे लिये मेरी माँ है सबसे निराली।

As the mother day dawns near,,
Mother I miss your loving and caring nature.
You kept in your womb for nine months,,
Nurturing me until I was born.
Then Nani took over and made me healthy,,
Nana took me to Doctor when I was not well one day.


This was extent my grandparents took care of me,,
In few days I was born.
My aunties gave me a lot of love,,
They pampered me with everything.
They never let me cry,,
My uncles listened everything I told them.
My papa made me face this hard world,,
So I should not cry because the world is rough.
But sometimes it goes beyond capacity,,
And I let tears flow so pain is light.
So on occasion of mothers day,,
I wish my parents,grandparents, aunties and uncles.
A very Happy mother’s day
Thank you for your love and support throughout from birth to what I am here today..

Beautiful Mothers day poetry

हे जननी , हे जन्मभूमि , शत – बार तुम्हारा वंदन है ।
सर्वप्रथम माँ तेरी पूजा , तेरा ही अभिनन्दन है ||
तेरी नदियों की कल – कल में सामवेद का मृदु स्वर है|
जहाँ ज्ञान की अविरल गंगा , वहीं मातु तेरा वर है |
दे वरदान यही माँ , तुझ पर इस जीवन का पुष्प चढ़े तभी सफल हो मेरा जीवन , यह शरीर तो क्षण – भर है । मस्तक पर शत बार धरूं मै , यह माटी तो चन्दन है |


सर्वप्रथम माँ तेरी पूजा , तेरा ही अभिनन्दन है।
क्षण – भंगुर यह देह मृत्तिका , क्या इसका अभिमान रहे |
रहे जगत में सदा अमर वे , जो तुझ पर बलिदान रहे।
सिंह – सपूतों की तू जननी , बहे रक्त में क्रांति जहाँ, प्रेम , अहिंसा , त्याग – तपस्या से शोभित इन्सान रहे।
सदा विचारों की स्वतन्त्रता , जहाँ न कोई बंधन है।
सर्वप्रथम माँ तेरी पूजा , तेरा ही अभिनन्दन है |

माँ बाप का सहारा हूँ मैं!!!
सब को हँसा के खुद को हँसा नहीं पाता हूँ,,
हालातो से लड़ लेता हूँ, पर अपनों के तानों से हार जाता हूँ।
रात को सब सोच के आखो को रुलाता हूँ,,
सुबह फिर एक मुस्कान के साथ जाग जाता हूँ।।

कभी हिम्मत नहीं हारा हूँ मैं,,
माँ बाप का सहारा हूँ मैं।
हर कदम पर चुनौतीयों से टकराता हूँ,,
अपनों के वास्ते सब ख्वाहिशें लुटाता हूँ।।

पल पल टूट के मज़बूत होता जाता हूँ
गिर कर खुद ही संभल जाता हूँ।
कभी तारीफ़ नहीं करना मेरी,,
मै तो बेटा होने का कर्तव्य निभाता हूँ।।

मैं बड़ी फुरसत से सुनता हूं,,
कहानी माँ जब सुनाती है।
अपना गम छुपाती है मुझे हंसती है,,
माँ इतना चुप रह जाती है।।
रात मैं चुप गुम सुम बैठी,,
खुद से कुछ बतियाती है।
माँ , कह दो बस!!
अपने आप को भूल जाती है,,
मेरी माँ मुझे बहुत याद आती है।।

Beautiful Mothers day poetry

To my mother :
Thank you for the life you gave me,,
From inside your womb.
To my childhood days,,
From childhood to adulthood.
You were always there for me,,
can never repay your loving support.
I can only wish I could be beside you,,
Well into your last days……

चाहे हूँ रूपवती,चाहे मैं कुरूप हूं,,
कोमल सा हृदय लिए ममता का एक रूप हूं।
मूल्य चुका ना पाया वो कर्ण भी मेरे दूध का,,
दानवीर कहता जिसे इतिहास दूर – दूर का।।
यज्ञ से जन्मी अग्नि मैं, रक्त से केश भिगोए है,,
जाने कितने दुष्टों के पाप धरा ने धोए हैं।
बनकर कभी भीलनी मैंने ईश्वर को झूठ खिलाया है,,
वहीं कहीं बन अहल्या स्पर्श का आनंद पाया है।।


सीता बन दुर्भाग्य को अब भी गले लगाती हूं,,
राधा बन निश्चल प्रेम को अश्रुओं से नहलाती हूँ।
जान बचाने अपने लाल की उसको खुद से दूर किया,,
देवकी अभागन बनने को जब सृष्टि ने मजबूर किया।।
बन यशोदा शिशु किसी का हृदय से अपने लगाया है,,
नारी दुर्बल कहते तुम? अरे मुझमें ब्रह्मांड समाया है।
उस युग से इस युग और अगले कईं युगों का कूप हूँ,,
कोमल सा हृदय लिए ममता का एक रूप हूं।।

–मेरी मां-
मेरी हर कमी को पूरा करती थी वो,,
मेरे हर इशारे को समझती थी वो।
मेरे ज़िन्दगी जीने का सहारा थी वो,,
वो थी तो सब कुछ था,वो नहीं तो अब कुछ नहीं।।
एक आंधी आई,,और, सब बहा ले गई,,
अब क्या शिकवा करूं किसी से जब ज़िन्दगी ही दगा दे गई।
उलझ गया हूं, दुनिया के इस जाल में,,
धोखे ही मिलें हैं, हर डगर हार हाल में।।
आज रोता हूं, तो कोई पूछता नहीं,,
कल वो पूछती थी, तो रो देता था मैं।
अब भी याद आती है वो,,
मै उसका और हमेशा मेरी है वो।।
मेरी माँ

Beautiful Mothers day poetry

पाला , पोषा , और बड़ा किया,,
जिसने कदम – कदम पर मेरा साथ दिया।
फिर भी वो ना किसी से कुछ कहती है,,
ना जाने वो कितने दुःख – दर्द सहती है।।
और मैं इस दिल को कैसे टूटने दूं,,
जिसमें मेरी माँ रहती है!

हर त्यौहार पर मुझे नये कपड़े दिलाती है,,
और खुद पुरानी साड़ी पहना करती है।
जब भी होता हूँ दुःखी तो माँ प्यार से गले लगाती है,,
एक माँ ही हैं जो मेरी हर बात समझती है।।
और मैं इस दिल को कैसे टूटने दूं,,
जिसमें मेरी माँ रहती है!!

शहर में आया हूँ अब करने कमाई,,
सहसा ही आँखों से आ जाते है आँसू।
माँ जब – जब तेरी याद आई,,
मेरे लिए तो भगवान से बढकर है।।
माँ तेरी परछाई,,
माँ तु मीलों दूर होकर भी मेरे मन की बात समझती है।
और कैसे टूटने दूं मैं इस दिल को,,
जिसमें मेरी माँ रहती है!!

माँ तेरा दिया सौ का नोट,,
आज भी भारी है आज हजारों पे।
और अब वो रंगत नहीं पहले सी बाजारों में,,
इस भीड़ भरी दुनिया में
मोहताज हूँ तेरी आशीर्वोद सी बातों का।।
एक दिन भी एक साल सा लगता है,,
माँ तेरे बिन शहर की काली रातों का।
वो माँ ही है जो आज भी गाँव में मेरा इंतजार करती है,,
और कैसे टूटने दूं मैं इस दिल को,,
जिसमें मेरी माँ रहती है!!!

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