माँ

माँ एक सुखद अनुभूति है। वह एक शीतल आवरण है जो हमारे दुःख, तकलीफ की तपिश को ढँक देती है। उसका होना, हमें जीवन की हर लड़ाई को लड़ने की शक्ति देता रहता है। सच में, शब्दों से परे हैै मा की परिभाषा।

कुछ शब्द हम सभी की माँ के लिए

1.

बड़ी बड़ी आँखों से, वो सारे ख्वाब बुन लेती है।
आते जाते हवाओं से, वो खुशियां थोड़ी चुन लेती है।।
वो होती है साथ मेरे, तो मुश्किल थोड़ी आसान सी लगती है।
उसके आँचल में छुप जाऊँ, गम की लकीरें मिट जाती हैं।।
उसके मुस्कुराने भर से, दुनियां मेरी सँवर जाती है।
वो परी है मेरे रु-बरु, मा
ता कहूँ तो जन्नत यहीं मिल जाती है।।

                                2.

सुने थे जो लफ्ज कभी बचपन में माँ से,,
वो किसी बाज़ार में यहाँ बिकते नहीं।
गुजार लो वक्त माँ के आँचल में,,
फिर ना कहते फिरना…
की सच्चे चाहने वाले आज कल मिलते नहीं।।

                            3.

!!!!!!
आपके आंचल की छाओं में कितना सुकून पाते थे,,
सौ परेशानियों में भी हम बेपरवाह, बेफिक्र,जीवन बिताते थे ।
मन में होती थी जो कोई भी बात आपको बताते थे,,
जब से उठा है आपका हाथ, हमारे सिर से
तब से कई बार हम, खुद को चुप कर के रह जाते है।।

                              4.

नीःशब्द हूँ, नीःस्वार्थ हूँ,,
में अपनी माता से ही कृतार्थ हूँ।
है परिचय मेरा मेरी माता से ही,,
मैं मां का ही तो भावार्थ हूँ।।
जब माता है साथ मेरे तो सब हूँ मैं,,
अगर
माता नहीं तो बस अपार्थ हूँ।।।

                              5.

वो मगरूर हैं, अभी नशे में चूर हैं,आशिकी के सुरूर में,
वक़्त ढलेगा, और तन्हाई आएगी,, इश्क का नशा
उतरते ही उनको भी माँ की याद आएगी।
फिर वो, माँ ही माँ चिल्लायेंगे,,
मा की तस्वीर से लिपट कर,वो अपना दर्द सुनाएंगे।।
फलक से भी माँ उनके सर को सहलाएंगी,,
सच्ची मुहब्बत क्या है, उस दिन वो असल मे जान जाएंगे।।।

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4 thoughts on “माँ

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