इश्क के आलम में

इश्क के आलम में

इश्क के आलम में जब भी हमें किसी से सच्ची मुहब्बत हो जाती है। उसके आगे हर चीज फीकी हो जाती है,
फिर उसको देखने के लिए हर पल हम तरसते रहते हैं।

और जब हम उनसे मिलते हैं। तब हमें सुकून मिलता है, और उनको देखकर हमारे दिल में उनके लिए जो बातें छिपी रहती हैं वो उनके लिये निकल कर सामने आ जाती हैं

कविता (इश्क के आलम में)

देखा जो डूब कर आपकी निगाहों में
मैं मिला न मुझको मेरी ही पनाहों में
यूँ तो लाखों चेहरे हैं इस जहां में,,
आप जैसा कोई न मिला इन फिजाओं में
करने को तो हर पल सजदा करूँ तुम्हारा,,
पर देखूं किस तरफ इन चारों दिशाओं में,,
एक अजब सा नशा है,, तुम्हारी इन मदमस्त निगाहों में,,
यूँ तो काम बहुत हैं मेरे पास मगर,,
आजकल खोया रहता हूँ आपके ख्यालों में,,,
न शब्द रहते हैं, न सवाल रहते हैं,,,,
अब तो बस आपको लेकर मन में बवाल रहते हैं,,


चुप कराता रहता हूँ इनको मगर,,,
इनके भी कुछ सवाल रहते हैं,,
हूँ तो नादान में भी बहुत मगर,,,
कुछ ख्वाहिशें में भी बुन लेता हूँ,,,
जब बात आती है यादों में से कुछ चुनने की,,,
में आपकी निगाहों को ही चुन लेता हूँ,,,
वैसे तो आपकी जुल्फों के अफ़साने हजार हो जाते है,,,
न चाहते हुए भी इश्क के बीमार हो जाते हैं,,,


कहीं गुम न हो जाएं इनमें हम
पल-पल सोचते हैं हम इनसे बचने की,,
फिर भी इनके दीदार हो जाते हैं,,,,
आपकी इन जुल्फों के अफ़साने हजार हो जाते हैं,,
हर पल सोचता तो हूँ आपके नजराने मैं
चार चांद लगा रहा है ये ऐनक आपके फसाने में,,
यूँ तो बला की खूबसूरती दी है,,,,
आपको, खुदा नें इस जमाने में,,,,
ऊपर से कोई कसर नहीं छोड़ी आपकी अदाओं ने,,,,
इस नाचीज को आपका कदरदान बनाने में,,,,

मेरे ह्रदय का झुकाव तेरी ओर है,,,मैं वो कठपुतली हूँ,

जिसकी तेरे हाथों में बागडोर है

Thats all

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4 thoughts on “इश्क के आलम में

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